निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद के आकस्मिक निधन से अल्पमत में 'नायब' सरकार

NaradSandesh।।चंडीगढ़। हरियाणा की नायब सरकार पर संकट के बादल फिर मंडराने लगे हैं। दरअसल, गुरुग्राम की बादशाहपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद का शनिवार, 25 मई को हार्ट अटैक से निधन हो गया था। निर्दलीय विधायक के निधन के बाद हरियाणा की  भाजपा सरकार पर अल्पमत का खतरा बन गया है। ऐसे में विपक्ष एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है। इससे पहले भी विपक्ष सरकार से फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग कर चुका है। प्रदेश में लोकसभा चुनाव -2024 के लिए मतदान संपन्न हो गया। आज रविवार है। सोमवार से जैसे ही सरकार काम पर लौटेगी विपक्ष फिर से हमलावर होने वाला है।



हरियाणा विधानसभा में मौजूदा वक्त में कुल बहुमत का आंकड़ा 44 का है, लेकिन भाजपा सरकार के पास अब सिर्फ 42 ही विधायकों का समर्थन शेष बचा है। कांग्रेस और जजपा पहले ही राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को पत्र लिखकर नायब सैनी सरकार के बहुमत साबित करने की मांग कर चुकी है। ऐसे में अब फिर इस मुद्दे पर सियासत तेज हो सकती है। नायब सरकार का पहले ही कार्यकाल गिनती का है उसपर भी हर महीने कुछ न कुछ घटनाक्रम विधायकों को लेकर होता रहता है। सरकार के नक्षत्र ठीक नहीं लग रहे हैं।



हरियाणा प्रदेश में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। इसमें करनाल विधानसभा से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और रानियां से निर्दलीय विधायक रणजीत चौटाला ने इस्तीफा पहले ही दिया हुआ है। क्योंकि दोनों ही नेताओं ने अभी हाल ही लोकसभा का चुनाव लड़ा हैं।  जिसके बाद हरियाणा में कुल 88 विधायक शेष बचे। अब 25 मई को गुरुग्राम से निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद का निधन हो गया, तो कुल विधायक 87 रह गए हैं और बहुमत का आंकड़ा 44 का हो गया है। लेकिन वर्तमान में केवल 42 ही विधायकों का समर्थन है।


भाजपा जजपा गठबंधन की सरकार में मनोहर लाल द्वारा सीएम के पद से त्यागपत्र देने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी द्वारा नायब सिंह सैनी हरियाणा प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाया गया था। बहुमत साबित करने के समय पर नायब सैनी को भाजपा के 41, हलोपा के 1 और 6 निर्दलीय समेत 48 विधायकों का समर्थन मिला। इसके बाद मनोहर लाल और रणजीत सिंह ने इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा 3 निर्दलीय विधायकों धर्मपाल गोंदर, रणधीर गोलन और सोमबीर सांगवान ने सैनी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। जिसके बाद सरकार के पास 43 विधायकों का समर्थन बचा। अब निर्दलीय विधायक के निधन के बाद सरकार के पास 42 विधायकों का समर्थन शेष बचता है।

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